करीब 40 हजार करोड़ रुपए के मैट बकाए पर सरकार सख्ती के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का भारत से मोह खत्म नहीं हो रहा है। जनवरी-मार्च तिमाही में एफआईआई ने 35,298 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश भारत में किया है। इस पर मार्केट एक्सपर्ट और ब्रोकरेज हाउस कहते हैं कि मैट मुद्दा काफी गंभीर है। सरकार को जल्द इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। मॉर्गन स्टैनली इंडिया के मुताबिक अगर इसका जल्द समाधान नहीं हुआ तो भारतीय शेयर बाजार में फिर से अनिश्चितता का माहौल बन जाएगा और भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
विदेशी निवेशक लगातार कर रहे हैं भारत में निवेश
2015 के पहले तीन महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 35,298 करोड़ रुपए का निवेश किया है। वहीं, डेट मार्केट में एफआईआई ने 41,834 करोड़ रुपए का निवेश किया है।
मजबूत फंडामेंटल के चलते भारत से निवेश घटने की आशंका कम
उभरते बाजारों में इंडिया जैसा कोई और मार्केट नहीं हैं जहां ऐसे स्ट्रॉन्ग मैक्रो और माइक्रो मौके एक साथ मिल रहे हों। पहला, महंगाई घट रही है,जिसका मतलब यह हुआ कि इंटरेस्ट रेट में कटौती जारी रहेगी। इसके साथ ही हमारे हिसाब से ग्रोथ जितनी घटनी थी, घट चुकी है। अब यह बढ़ रही है। कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने पर फोकस है और पिछले 8 से 10 महीनों में खास तौर पर मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से गवर्नेंस में सुधार लाने और ई-बिजनेस अपनाकर क्षमता बढ़ाने पर ज्यादा फोकस है।
क्या कहते हैं बाजार के एक्सपर्ट
क्रिस रिसर्च के संस्थापक अरुण केजरीवाल कहते हैं कि मैट को लेकर मिले नोटिस से एफआईआई के सेंटिमेंट पर असर होगा। इस पर जल्द सरकार को अपना रुख साफ करना चाहिए। छोटी अवधि में तो बाजार पर ज्यादा असर नहीं आएगा। लंबी अवधि में इससे सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट दिखा सकते हैं।
मायस्टॉक के हेड लोकेश उप्पल का मानना है कि कर नियमों में बदलाव विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट खराब कर सकता है और इसका असर बाजार पर दिखना मुमकिन है।
मैट मामले से एफआईआई के सेंटिमेंट पर हो सकता है असर
ब्रोकरेज हाउस मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय ने पहला अहम कदम उठाते हुए स्पष्ट किया कि एफआईआई पर मैट 1 अप्रैल, 2015 से लागू नहीं होगा। लेकिन इसके साथ कुछ इश्यू हैं। हम उम्मीद करते हैं कि संसद में बजट पास होने के बाद इन्हें निपटा लिया जाएगा। रेट्रोस्पेक्टिव मैट कई इनवेस्टर्स के लिए चौंकाने वाली बात है। हम अगले 10-12 महीने इंतजार करेंगे। FII को लगता है कि वित्त मंत्री और मंत्रालय चीजें सही करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि आगे समस्या नहीं आए। अब वे ऐसा कर रहे हैं तो पुराने इश्यू जरूर सामने आएंगे, जिनको अभी निपटाना होगा।
No comments:
Post a Comment