नई दिल्ली. छुट्टी पर चल रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को 56 दिनों बाद दिल्ली लौट आए। खबरों के मुताबिक वह बैंकॉक से दिल्ली पहुंचे हैं। गुरुवार को 11.15 बजे थाई जेट एयरवेज के विमान से वह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। उनकी फ्लाइट 10.35 पर ही दिल्ली पहुंचने वाली थी लेकिन किन्हीं कारणों से देर हो गई। एयरपोर्ट पर उतरते ही वह सीधे 12 तुगलक लेन स्थित अपने घर पहुंचे जहां पर पहले से ही उनकी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका इंतजार कर रही थीं।
बता दें कि राहुल गांधी छुट्टी मनाने कहां गए थे इसे लेकर पिछले 56 दिनों से देश में तरह-तरह की चर्चाएं थीं। एक ओर जहां मीडिया में खबरें आ रही थीं कि राहुल गांधी यूरोप या वियतनाम में हैं तो दूसरी ओर कहा जा रहा था कि वह थाईलैंड में छुट्टियां मना रहे हैं। गुरुवार को थाई जेट एयरवेज से दिल्ली लौटने पर यह कंफर्म माना जा रहा है कि वह थाईलैंड में ही थे।
56 दिनों के छुट्टी से राहुल गांधी के घर लौटने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया। दिल्ली में राहुल गांधी के घर के बाहर गुरुवार की दोपहर एकत्र हुए कांग्रेस सदस्यों ने जमकर पटाखे फोड़े। हालांकि, इस मौके पर राहुल के घर सोनिया गांधी और प्रियंका के अलावा कांग्रेस को कोई बड़ा नेता नहीं नजर आया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी अपना वक्त परिवार के साथ बिताना चाहते थे, इसलिए वहां कांग्रेस का कोई बड़ा नेता नहीं था। गुरुवार की शाम को राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं।
लौटते ही मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण का विरोध
राहुल के करीबी युवा नेताओं ने कांग्रेस की 19 अप्रैल की प्रस्तावित रैली को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ ही राहुल गांधी भी इस रैली को संबोधित करेंगे। मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध में होने वाली इस रैली को सफल बनाने के लिए लाखों लोगों को लाने की योजना है। राहुल गांधी के दो करीबी नेता, राजस्थान के सचिन पायलट और हरियाणा के दीपेंद्र हुड्डा दोनों राज्यों से लोगों को लाने में जुटे हुए हैं। सचिन पायलट राजस्थान से एक स्पेशल ट्रेन ‘किसान एक्सप्रेस’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें राजस्थान के लोग होंगे। इस ट्रेन में महिलाओं के लिए एक अलग कोच होगा और पूरी ट्रेन को कांग्रेस के झंडे और बैनरों से पाट दिया जाएगा। बैनर्स पर जो नारे लिखे होंगे उनमें से एक है ‘नरेंद्र मोदी किसान विरोधी’।
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