नई दिल्ली/बीजिंग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 3 दिवसीय चीन दौरा 14 मई को शिआन से शुरू होगा, जो दुनिया के 4 प्रमुख प्राचीन शहरों (तीन अन्य एथेंस, काहिरा और रोम) में से एक है। यह चीन के शांक्सी प्रांत की राजधानी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का गृहनगर भी है। मोदी की मेजबानी यहां शी दंपति करेंगे। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शिआन में चीन के पहले सम्राट चिन शी हुआंग की हजारों साल पुरानी टेराकोटा आर्मी भी है जिसे दुनिया का 8वां अजूबा कहा जाता है। मोदी टेराकोटा वारियर्स म्यूजियम देखने जा सकते हैं। 8000 सैनिकों, 130 रथ, 520 घोड़ों और 150 घुड़सवारों वाली यह आर्मी सम्राट के मकबरे में खुदाई के दौरान 29 मार्च 1974 को सामने आई थी। शिआन की आबादी लगभग 85 लाख है और इसी शहर ने चीन का पहली बार इस्लाम से परिचय करवाया था। लिहाजा आज भी यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम रहते हैं। 1990 के दशक के बाद शिआन उस वक्त एक सांस्कृतिक, औद्योगिक और शिक्षा के केंद्र के रूप में उभरा था, जब चीन सरकार ने सेंट्रल और नॉर्थ-वेस्ट रीजन में आर्थिक पुनरुत्थान (Economic Revival) के कार्यक्रम शुरू किए। इस दौरान शहर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट, नेशनल सिक्योरिटी और स्पेस प्रोग्राम के लिए कई सुविधाएं जुटाई गईं।
शिआन का ही चुनाव क्यों?
मोदी को शिआन आने का न्योता जिनपिंग ने पिछले साल सितंबर में अपनी भारत यात्रा के दौरान दिया था। चीनी अधिकारियों के मुताबिक अब तक ऐसा बहुत कम हुआ है कि चीन में विदेशी मेहमानों का स्वागत बीजिंग को छोड़कर किसी दूसरे शहर में किया गया हो। मोदी के लिए शिआन का चयन इसलिए किया गया क्योंकि राष्ट्रपति जिनपिंग उनका स्वागत उसी तरह गर्मजोशी से करना चाहते हैं जैसा मोदी ने पिछले साल उनका अहमदाबाद में किया था। हालांकि विदेश नीति के जानकार मोदी-जिनपिंग की इस 'दोस्ती' को बिजनेस के लिए एक स्वाभाविक मित्र की तलाश कह रहे हैं।
मोदी को शिआन आने का न्योता जिनपिंग ने पिछले साल सितंबर में अपनी भारत यात्रा के दौरान दिया था। चीनी अधिकारियों के मुताबिक अब तक ऐसा बहुत कम हुआ है कि चीन में विदेशी मेहमानों का स्वागत बीजिंग को छोड़कर किसी दूसरे शहर में किया गया हो। मोदी के लिए शिआन का चयन इसलिए किया गया क्योंकि राष्ट्रपति जिनपिंग उनका स्वागत उसी तरह गर्मजोशी से करना चाहते हैं जैसा मोदी ने पिछले साल उनका अहमदाबाद में किया था। हालांकि विदेश नीति के जानकार मोदी-जिनपिंग की इस 'दोस्ती' को बिजनेस के लिए एक स्वाभाविक मित्र की तलाश कह रहे हैं।
Act East नीति को डिफाइन करेगा दौरा
शिआन का ऐतिहासिक नाम चांगअन (Chang’an-शाब्दिक अर्थ- शाश्वत शांति) है। चीन की जड़ें इसी शहर में हैं। कहा जाता है कि अगर आपको 100 साल पुराने चीन को समझना है तो शंघाई जाना होगा, 1000 साल पुराने चीन को समझना है तो बीजिंग और अगर 3000 साल पुराने इतिहास को जानना है तो शिआन। ये तीनों ही चीन के सबसे पुराने शहर हैं। शंघाई ग्लोबल फाइनेंशियल हब है, जबकि बीजिंग चीन की कैपिटल। प्रधानमंत्री मोदी तीनों शहरों में जाएंगे। विदेश नीति के जानकारों के अनुसार मोदी के लिए यह दौरा काफी अहम है जो उनकी Act East विदेश नीति को भी डिफाइन करेगा।
शिआन का ऐतिहासिक नाम चांगअन (Chang’an-शाब्दिक अर्थ- शाश्वत शांति) है। चीन की जड़ें इसी शहर में हैं। कहा जाता है कि अगर आपको 100 साल पुराने चीन को समझना है तो शंघाई जाना होगा, 1000 साल पुराने चीन को समझना है तो बीजिंग और अगर 3000 साल पुराने इतिहास को जानना है तो शिआन। ये तीनों ही चीन के सबसे पुराने शहर हैं। शंघाई ग्लोबल फाइनेंशियल हब है, जबकि बीजिंग चीन की कैपिटल। प्रधानमंत्री मोदी तीनों शहरों में जाएंगे। विदेश नीति के जानकारों के अनुसार मोदी के लिए यह दौरा काफी अहम है जो उनकी Act East विदेश नीति को भी डिफाइन करेगा।
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