शुरुआत में ही आरएसएस ने इकॉनमी के मसले पर डिलिवरी को लेकर अपना इरादा साफ कर दिया था। एक साल के दौरान सरकार की छवि को लेकर संघ चिंतित है। सूत्रों का कहना है कि लैंड बिल और सूट-बूट के मसले पर मोदी सरकार की छवि खराब हुई है। इन चीजों को लेकर संघ गंभीर है।
राजनाथ सिंह ने पिछले हफ्ते गुरुवार को नागपुर जाकर संघ प्रमुख से मुलाकात की थी। इसके बाद शनिवार को बीजेपी चीफ अमित शाह मोहन भागवत से मिले। सोमवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी नागपुर जाकर मोहन भागवत से मुलाकात की। इसी हफ्ते अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी भी नागपुर जाकर आरएसएस चीफ से मुलाकात करेंगे।
इससे पहले गडकरी भी हेडगेवार भवन में हाजिरी लगा चुके हैं। गडकरी, पर्रिकर और शाह से आरएसएस ने सरकार और पार्टी से कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर की है। राजनाथ की मुलाकात के बाद से ही कयास तेज थे कि उन्होंने अमित शाह की कार्यशैली को लेकर आरएसएस चीफ से आपत्ति जतायी है।
इस मामले की राजनीतिक गतिविधियों से करीबी रखने वाले बीजेपी के एक भीतरी सूत्र ने कहा कि न तो हर दिन निर्देश नहीं दिया जा सकता है और न ही लिया जा सकता है। एक साल हो चुका ऐसे में कई मसलों पर बातचीत जरूरी है। उन्होंने कहा कि आरएसएस को ऐसा लग रहा है कि हिन्दुत्व के कुछ अजेंडे अहम हैं और इन्हें इकनॉमिक अजेंडों के कारण किनारे कर दिया गया है।
हालांकि राजनाथ सिंह के सहयोगी ने गंभीर बातचीत होने की बात को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह नागपुर माओवादी घटनाओं पर होने वाली मीटिंग में शामिल होने गए थे। उन्हें पता चला कि मोहन भागवत शहर में हैं इसलिए उन्होंने मुलाकात की। पार्टी के टॉप सूत्रों के मुताबिक कम से कम दो और मंत्री आने वाले दिनों में मोहन भागवत से मुलाकात कर सकते हैं।
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