Sunday, March 29, 2015

जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से 8 की मौत, मोदी ने नकवी को किया तैनात

श्रीनगर में रविवार को सड़कों पर भरे पानी के बीच सुरक्षा जवान।
श्रीनगर में रविवार को सड़कों पर भरे पानी के बीच सुरक्षा जवान।
श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के लोग पिछले साल सितंबर में आई भीषण बाढ़ से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि एक बार फिर यहां भारी बारिश के कारण बाढ़ आ गई है। घाटी के कई इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी मंडराने लगा है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण झेलम नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। श्रीनगर शहर के कई इलाकों में पानी भर गया है। बड़गाम में बाढ़ से दो घर डूब गए हैं और इसमें आठ लोगों की मौत हो गई है। 13 लोग लापता भी बताए गए हैं।
सोमवार को भी घाटी के कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के नेतृत्‍व में पीएमओ के आला अधिकारियों की टीम श्रीनगर भेजी है। टीम वहां हालात का जायजा लेकर पीएम को रिपोर्ट देगी।
बड़गाम में एक पुल टूट जाने के कारण करीब दो हजार लोग फंस गए हैं। पुंछ और राजौरी में भी काफी पानी भर चुका है।भारतीय वायु सेना ने अपने चार एयरक्राफ्ट जम्मू-कश्मीर भेजे हैं जो एनआरएफ को मदद करने के साथ ही रसद भी वहां पहुंचाएंगे।
अलर्ट जारी, स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं रद्द
एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि घाटी में खतरे को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद भी रविवार रात श्रीनगर पहुंच चुके हैं। सोमवार और मंगलवार को होने वाले वाली स्कूल और कॉलेज की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके अलावा प्रशासन ने पिछले साल आई बाढ़ से सबक लेते हुए कंट्रोल रूम भी बना दिए गए हैं जो 24 घंटे हालात पर नजर रखेंगे। अगले 48 घंटे तक खतरा बना रहने की चेतावनी भी दी गई है। दूसरी ओर, एनडीआरएफ के डीजी ओपी. सिंह ने कहा है कि फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं है लेकिन हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं और एनडीआरएफ की चार टीमों को तैयार रखा गया है।
मौसम विभाग ने कहा, अगले सात दिन खतरनाक

घाटी में जारी बारिश और बाढ़ के खतरे पर मौसम विभाग ने कहा है कि पहाड़ी राज्यों को इस हफ्ते काफी सतर्क रहने की जरूरत है। विभाग ने कहा है कि इन राज्यों में अगले दो दिन तक तेज बारिश हो सकती है, उसके बाद दो दिन हल्की बारिश होगी लेकिन इसके बाद फिर तेज बारिश होने की आशंका है। विभाग ने कहा कि बाढ़ का डर तो नहीं है लेकिन हिमस्खन को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया गया है।
सईद ने मांगी सेना से मदद
सीएम सईद ने सेना से मदद की अपील की है जिसने पिछले साल सितंबर मे आई बाढ़ से निपटने में अहम भूमिका निभाई है। श्रीनगर और पुलवामा में नदी के किनारे रह रहे लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कहा गया है। शोपियां और कुलगाम में भारी बारिश के कारण कुछ पुल भी बह गए हैं। बता दें कि यहां शनिवार से बारिश जारी है और इस कारण घाटी की नदियों में पानी का खतरा बढ़ गया है। श्रीनगर के राम मुंशी बाग में झेलम नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को एनडीआरएफ के 200 जवान श्रीनगर पहुंच जाएंगे, जिससे बिगड़ रहे हालात में लोगों की मदद की जा सके। भारी बारिश की वजह से घाटी के कई इलाकों में पानी भी भर गया है और कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। भूस्खलन से श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिया गया।
हालात पर राजनीति भी शुरू
राज्य के हालात पर पूर्व सीएम उमर अबदुल्ला ने कहा है कि पिछले साल सितंबर जैसे हालात पैदा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘ पिछले साल के खराब अनुभवों से हमने काफी सबक सीखे हैं। तटबंध अगर सलामत रहे तो कोई खतरा नहीं है। पिछले साल जिन अफसरों ने हालात संभाले थे इस बार भी उन्हीं अफसरों को जिम्मेदारी देनी चाहिए। हमें पिछली बार केंद्र सरकार से कोई मदद नहीं मिली थी लेकिन अब राज्य सरकार को केंद्र से मदद मांगनी चाहिए।’ वहीं, पैंथर्स पार्टी के भीम सिंह ने कहा कि पिछली बार की बाढ़ से केंद्र और राज्य सरकार ने कोई सबक नहीं सीखा क्योंकि यहां पानी के निकास की कोई व्यवस्था नहीं है।

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