नई दिल्ली। इलाज कराकर लौटे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
के लिए पार्टी के अंदरूनी घमासान से निपटना बड़ी चुनौती है। सोमवार रात जब
मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास, आशुतोष, आशीष खेतान और संजय सिंह उनसे
मिलने गए तो उन्होंने अपनी गैरहाजिरी में हुए घटनाक्रम पर नाराजगी जताई। केजरीवाल
आप नेताओं द्वारा मीडिया को बयान जारी कर प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव
को पीएसी (राजनीतिक मामलों की समिति) से निकालने की वजह बताए जाने पर खास
तौर से नाराज दिखे। बैठक में केजरीवाल और उनके नेताओं के बीच कुछ इस तरह
बातचीत हुई-
केजरीवाल - अंदरूनी विवाद को पार्टी की ओर से बयान जारी कर
सार्वजनिक करने की जरूरत क्यों पड़ी। हम सभी का तो एक ही सूत्र है कि जनता
के लिए बेहतर कामकाज करना, ऐसा क्या हो गया जो इस तरह का कदम उठाया गया।
संजय सिंह - विवाद लगातार बढ़ रहा था और पार्टी की छवि खराब हो रही थी। इसलिए मीडिया को पार्टी की ओर से बयान जारी किया गया।
केजरीवाल - इस बयान के बाद क्या विवाद थम गया। सबकुछ ठीक हो गया।
आशीष खेतान - नहीं, सबकुछ ठीक तो नहीं हुआ। लेकिन बयानबाजी में जरूर कमी आ गई।
सिसोदिया - मुझे लगता है कि हमें बयान जारी करने से पहले दोनों लोगों से बातचीत करनी चाहिए थी।
केजरीवाल - यही मैं कह रहा हूं और यदि कोई बयान जारी भी करना
था तो पार्टी की ओर से क्यों किया गया। ये तो उचित नहीं, क्योंकि प्रशांत
और योगेंद्र जी पार्टी का हिस्सा हैं। उनसे सीधे तौर पर बातचीत करने में
कोई मुश्किल नहीं है।
कुमार विश्वास - हां, ये सही है। इस तरह से बयानबाजी में भले कमी आई हो। लेकिन विवाद तो बढ़ा है।
केजरीवाल - इस दौरान आप लोगों का कोई संवाद प्रशांत और योगेंद्र जी से हुआ है।
सिसोदिया - नहीं।
कुमार विश्वास - मेरी फोन पर एक-दो मर्तबा बातचीत हुई है।
केजरीवाल - मुझे लगता है कि आप लोगों ने इस मामले को सार्वजनिक
किया है। उन्होंने तो इस मामले में सार्वजनिक तौर पर कोई ऐसा बयान नहीं
दिया था। पिछले दिनों राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद भी ऐसी कोई बात
नहीं सामने आई थी, जिसके चलते पार्टी को उनके खिलाफ कोई बयान देना पड़े।
आशीष खेतान - पर चुनाव के दौरान जो हुआ। उसे तो नकारा नहीं जा सकता।
केजरीवाल - बीती बातों पर गौर करेंगे तो फिर दिल्ली की जनता को
क्या मुंह दिखाएंगे। पार्टी की छवि को उस तरह का मत बनाइए, जैसी औरों की
है। हमें अपने नाम की नहीं, पार्टी के नाम की अहमियत समझनी चाहिए।
संजय सिंह - पार्टी की छवि बचाने के लिए ही बयान जारी किया गया था।
केजरीवाल - छवि बयान जारी करने से नहीं, विवाद को अंदरूनी तौर
पर सुलझाने से कायम रहती। आज देशभर में यही चर्चा है कि आप के लोगों में
आपस में ही एका नहीं है। तमाम कयास लगाए जा रहे हैं, एेसा ही चलता रहा तो
पार्टी की छवि कैसे बचेगी। प्रशांत और योगेंद्र जी से मिलिए, उनसे संपर्क
करिए। यही उचित है, वह भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके बाद भी यदि
कोई हल नहीं निकलता तो आगे विचार किया जाएगा।
सभी - ठीक है, योगेंद्र जी से आज ही मिल लेते हैं।
केजरीवाल - विश्वास, आप प्रशांत जी से संपर्क करें, उनसे समय लें। यदि कोई और अड़चन हो तो बताएं।
कुमार विश्वास - नहीं कोई अड़चन नहीं हैं, बस मुझे एक ही बात कहनी हैं कि जब रस्सी में गांठ पड़ जाती है तो उसे पहले जैसा करना आसान नहीं होता।
केजरीवाल - आसान नहीं होता है, पर नामुमकिन नहीं और हम सभी तो
मुश्किल काम निपटाने के लिए बने हैं। तुम कौन सा एक जुमला सुनाते हो, वो
दुश्मनी जमके कर। क्या है कुमार भाई वो।
कुमार- हा...हा...हा....वो...सुनाता हूं- दुश्मनी तो जमके कर, पर यह गुंजाइश रहे। जब कभी हम दोस्त बनें, तो शर्मिंदा न हों...
गौरतलब है कि इस मुलाकात के बाद आप के नेताओं ने सोमवार रात को ही योगेंद्र यादव से मुलाकात की।
इस दौरान हुई बातचीत को योगेंद्र यादव ने अच्छी शुरुआत बताया, जबकि कुमार
विश्वास ने कहा कि परिवार के बीच संवाद शुरू हो गया है और निर्णय निकलते
ही मीडिया को इस बारे में बताएंगे।
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