Thursday, June 25, 2015

गुजरात में बारिश से शेरनी की मौत: 13 शेर लापता, 50 जंगल छोड़ गांवों में भागे

गुजरात के गिर के जंगलों से सड़क पर आए शेर। बताया जा रहा है कि जंगल में कीचड़ से शेर परेशान हो गए हैं।अहमदाबाद/अमरेली (गुजरात). बारिश और उसके बाद बाढ़ जैसे हालात से बुरी तरह प्रभावित गुजरात के अमरेली जिले में आम लोगों के साथ जंगल में रहने वाले जानवर, खासकर शेरों का जीना मुहाल हो गया है। मंगलवार से गुरुवार के बीच हुई बारिश के कारण एक शेरनी की मौत हो गई। 13 शेरों का पता नहीं चल रहा है, जबकि 50 शेर जंगल छोड़ गांवों में चले गए हैं। गुरुवार को गिर के जंगलों से निकले कुछ शेरों काे खुले आम सड़क पर घूमते भी देखा गया था (देखें वीडियो)
बारिश से सबसे ज्‍यादा प्रभावित अमरेली के लिलिया और कराकच में नदी के किनारे बसे बवाडी गांव में लोगों ने एक शेरनी का शव तैरते देखा। बवाडी गांव के ही रहने वाले बाबू सोजीतरा ने कहा, '' जब बारिश रुकी तो हम अपने खेतों में नुकसान का जायजा ले रहे थे। उसी दौरान हमने देखा कि एक खेत में कीचड़ से सना शेरनी का शव पड़ा था।'' कुछ लोगों का कहना है कि बाढ़ के कारण कराकच और लिलिया इलाकों की सड़कों पर शेरों को देखा गया है। लिलिया के निकट अनगोरोला गांव में एक शेरनी वहां के एक मंदिर में घुस गई है। बता दें कि बारिश के कारण गुजरात के अमरेली जिले में बाढ़ जैसे हालात हैं और अब तक 70 लोगों की मौत हो चुकी है।
जंगल छोड़ कर 25 गांवों में रह रहे हैं 50 शेर
सूत्रों के मुताबिक, जंगल में बारिश और कीचड़ के कारण शेर बाहर आ गए हैं। 50 ऐसे शेर हैं जो शेतुरनजी नदी के किनारे 25 गांव के आसपास इलाकों को अपना घर बना कर रह रहे हैं। मंगलवार की रात से ही इस इलाके में नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। (देखें फोटोज)
13 शेर लापता
अमरेली में भारी बारिश के बाद 13 शेर लापता पाए गए है। शेत्रुंजी नदी के आसपास ये सिंह डेरा डाले नजर आते थे। नदी गुरुवार को भी पूरे उफान पर रही। वन विभाग के मुताबिक, नदी के आसपास 40 शेरों का समूह रहता है। इनमें दो शेरनी, इनके तीन-तीन महीने के छह शेर के अलावा 10 नवजात शावक भी हैं। सप्ताहभर पहले ही जिले के शेढावदर के आसपास 13 शेरों का समूह नजर आया था। बुधवार को तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्र से कई भैंस और नीलगाय के भी बहने की जानकारी मिली है।
क्‍या कहते हैं अफसर
अमरेली के उप वन संरक्षक एमआर गुर्जर ने कहा, ''बारिश-बाढ़ में मरने वाली शेरनी आठ साल की थी। हमारी टीम उन सभी इलाकों-गांव में पहुंचने की कोशिश कर रही है, जहां शेरों के होने की संभावना है। अगर शेर कहीं फंसे मिलते हैं तो हम उन्हें वापस जंगल में छोड़ने की कोशिश करेंगे।''
* गुजरात में कुल शेर - 523
* गिर के जंगलों के बाहर रहने वाले शेर- 174
* लिलिया-कराकच में रहने वाले शेर- 50
(*आंकड़े पिछली गणना के मुताबिक, उससे पहले गुजरात में शेरों की संख्या 411 थी।)

बारिश-बाढ़ के कारण क्यों परेशान हैं शेर
जूनागढ़ इलाके में गिर के जंगलों में से शेर जैसे जानवर निकलकर हाईवे पर घूमते दिखाई दिए। बता दें कि गुजरात के गिर के जंगलों में शेरों की संख्या बढ़ी है। गुजरात में सौराष्ट्र के जंगलों के 20 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके के अंदर मौजूद संरक्षित क्षेत्रों में करीब 7 हजार छोटे तालाब और कुंड हैं। उनके आसपास फेंसिंग नहीं है। बारिश के कारण इन तालाबों का पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के इलाकों में घुस जाता है। इस वजह से गिर के सिंह पानी कम होने तक अपना इलाका छोड़ देते हैं। हालिया बारिश के बाद सिंह के सड़कों पर आ जाने का भी यही कारण हो सकता है। पिछले कुछ साल तक हर साल 15 सिंह गिर के इलाकों में मौजूद इन तालाबों में डूबकर मर जाते थे। तब खुले तालाबों और कुंडों की संख्या 25 हजार थी। गुजरात सरकार ने 2008 में एक योजना चलाकर तालाबों को कवर कराया था।

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