Thursday, June 25, 2015

जानिए क्यों नोटों के बंडल देकर दूध-ब्रेड खरीदते हैं जिम्बाब्वे के लोग

जानिए क्यों नोटों के बंडल देकर दूध-ब्रेड खरीदते हैं जिम्बाब्वे के लोगहरारे। जिम्बाब्वे अगले हफ्ते से देश में मौजूद अरबों-खरबों की देश की करेंसी (जिम्बाब्वे डॉलर्स) को अमेरिकी डॉलर से एक्सचेंज करेगा। देश के सेंट्रल बैंक ने गुरुवार को बताया कि राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की सरकार देश की मिट्टी मोल करेंसी के इस्तेमाल पर रोक लगा रही है। 2008 में मुद्रास्फीति की दर 500 बिलियन प्रतिशत तक चले जाने के बाद महंगाई आसमान छू गई। इसके बाद देश में अमेरिकी डॉलर्स और दक्षिण अफ्रीकी करेंसी रेंड का इस्तेमाल किया जाने लगा।
मुद्रास्फीति की दर आसमान छूने से जिम्बाब्वे की करेंसी की वैल्यू जमीन पर आ गई। एक आंकड़े के मुताबिक, वर्तमान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत जिम्बाब्वे करेंसी में 35,000,000,000,000,000 जिम्बाब्वे डॉलर हो गई है।
2008 में आर्थिक संकट की बानगी कुछ ऐसी थी कि जिम्बाब्वे के लोग प्लास्टिक बैग में नोटों के बंडल भरकर ले जाते थे और दुकानदार से बुनियादी वस्तुओं जैसे दूध, ब्रैड और अंडा खरीद कर लाते थे। कई बार ऐसा भी होता था कि दिन में दो बार चीजों के दाम बढ़ जाते थे।
रिजर्व बैंक ऑफ जिम्बाब्वे (आरबीजेड) के गर्वनर जॉन मांगुद्या ने बताया कि बैंक सोमवार से मार्च 2009 के पहले वाले खाताधारकों के जिम्बाब्वे डॉलर्स के बदले अमेरिकी डॉलर्स एक्सचेंज करेगा। यह लोकल करेंसी को खत्म करने की वैध प्रक्रिया है। जिम्बाब्वे के नागरिक सितंबर तक बैंक नोट को बदलवा सकते हैं। कई लोग स्मृति चिह्न के रूप में इसे विदेशी पर्यटकों को बेचने की तैयारी भी कर रहे हैं।
अभी वर्तमान में बैंक अकाउंट में बैलेंस के नाम पर इस समय 175 क्वाड्रिलियन जिम्बाब्वे डॉलर्स हैं। जिनकी कीमत सिर्फ पांच डॉलर है। जिनके पास 175 क्वाड्रिलियन ऊपर होगा, उन्हें 35 क्वाड्रिलियन जिम्बाब्वे डॉलर्स के बदले एक डॉलर दिया जाएगा।
2008 में आखिरी बार आरबीजेड ने 100 ट्रिलियन जिब्माब्वे डॉलर का बैंक नोट छापा था। जो पूरे सप्ताह के बस किराए की कीमत भी नहीं है। आरबीजेड के मुताबिक, कस्टमर्स द्वारा छिपाए गए 250 ट्रिलियन के पुराने नोट भी बदले एक डॉलर दिया जाएगा। इसका मतलब, जिसके पास 100 ट्रिलियन के नोट हैं, उसे सिर्फ 40 सेंट (डॉलर से छोटी यूनिट) मिलेंगे। बैंक को करीब जिम्बाब्वे डॉलर्स के बदले 20 मिलियन डॉलर (128 करोड़ रुपए) का भुगतान होने की आशा है।
जानिए क्यों नोटों के बंडल देकर दूध-ब्रेड खरीदते हैं जिम्बाब्वे के लोग
जिम्बाब्वे में एक बियर खरीदने के लिए आपको नोटों के ऐसे बंडल ले जाने पड़ेंगे। 2009 की रिपोर्ट के मुताबिक, 50 बिलियन जिम्बाब्वे डॉलर में दो ब्रेड के पीस मिलेंगे।

किस तरह एक लड़की को लग जाती है नशे की लत, ऐसी है 'Uवा' की कहानी

नेहा खान और युक्ती कूपर।चंडीगढ़। फिल्म Uवा ग्यारहवीं में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों की कहानी है। इसमें दिखाया जाएगा कि स्कूल में पढ़ते हुए बच्चे कैसी कैसी समस्याओं का सामना करते हैं। स्कूल के बाद कॉलेज में कदम रखते ही इन स्टूडेंट की लाइफ कैसे बदलती है। फिल्म में माला के रोल में नेहा खान हैं। कहती हैं, फिल्म में मुझे ड्रग्स का आदी दिखाया गया है। मेरे पेरेंट्स की आपस में बनती नहीं है। जिस वजह से मैं परेशान रहती हूं। अकेलेपन की वजह से डरी सहमी सी रहती हूं। अपना अकेलापन दूर करने के लिए ड्रग्स लेने लगती हूं। फिर मुझे इस नशे की आदत से बाहर आने मेें एक प्रोफेसर मदद करते हैं और आखिर में वे मुझे बाहर निकालने में कामयाब हो जाते हैं।
फिल्म Uवा अाज रिलीज हो रही है। जसबीर ने इसे डायरेक्ट किया है। ओम पुरी, जिमी शेरगिल, संजय मिश्रा, संग्राम सिंह, विक्रांत राय, रोहन मेहरा, लविन गोठी, मोहित बघेल की फिल्म में अहम भूमिकाएं हैं। अपनी इस फिल्म के प्रोमोशन के लिए कास्ट वीरवार को सेक्टर 8 के स्कोर क्लब पहुंची। डायरेक्टर के साथ नेहा खान, युक्ति कूपर और मोहित बघेल शामिल हुए। फिल्म पर बात करते हुए जसबीर ने बताया कि सोसाइटी में दर्जनों ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर कई बार फिल्में बन चुकी हैं। उन्हीं में यंगस्टर्स का मुद्दा ऐसा है जिसपर फिल्म Uवा बनाई है। जसबीर ने बताया कि यह फिल्म 5 दोस्तों- सलमान, दीनबंधु, विक्रम, राम और अनिल की कहानी है, जो नोएडा में रहते हैं। स्कूल तो जाते हैं पर उनका पढ़ाई लिखाई से दूर-दूर तक नाता नहीं। एक रात एक ऐसी घटना घट जाती है, जो इन सभी की जिंदगी बदल देती है। जो गुनाह इन युवाओं ने किया नहीं होता, उन्हें उसकी सजा भुगतनी पड़ती है। उनका सामना पुलिस ऑफिसर तेजवीर सिंह (जिमी शेरगिल) और जज (परीक्षित साहनी) से होता है।
रोशनी और माला की जोड़ी
युक्ती कूपर फिल्म में रोशनी के रोल में हैं। उन्होंने बताया कि मैं प्रिंसिपल की बेटी बनी हूं। जो अनुशासन प्रिय और आत्मविश्वासी है लेकिन स्कूल में वह बहुत बातूनी और शरारती है। उसे गांव से आए लड़के से प्यार होता है। वो उससे मिलने के बहाने ढूंढने लगती है। इसी बीच एक वारदात हो जाती है। जिससे उसे बेहद ठेस पहुंचती है। उसके बाद मेरी पूरी लाइफ बदल जाती है।
मोहित बघेल, एक्टर
पिछली दो फिल्में रेडी और किक सलमान भाई के साथ की है और इस फिल्म में मेरे किरदार का नाम भी सलमान खान है, जो न ही अनुशासनप्रिय है और न ही उसका लाइफ में कोई मकसद है पर उसकी लाइफ में एक घटना घटती है कि वो खुद लाेगों के आगे आता है। फिल्म में अपना नाम बहुत पसंद अाया। नेगेटिविटी की बजाए यूथ की नादानियों को बखूबी प्रस्तुत किया है। 
मोहित बघेल, एक्टर

शूटिंग के दौरान सबके सामने खिसक गई एक्ट्रेस की ड्रेस, तमन्ना ने बचाया

शूटिंग के दौरान सबके सामने खिसक गई एक्ट्रेस की ड्रेस, तमन्ना ने बचाया
मुंबई. फॉरेन ब्यूटी नोरा फतेही डायरेक्टर एस एस राजामौली के अपकमिंग प्रोजेक्ट 'बाहुबली' के प्रमोशनल सॉन्ग में नजर आएंगी। जब वे इसकी शूटिंग कर रही थीं, तब सेट पर उन्हें वार्डरोब मालफंक्शन का शिकार हुईं। सूत्रों के अनुसार, 'नोरा हैदराबाद में सॉन्ग की शूटिंग कर रही थीं। तभी अचानक उनका टॉप नीचे खिसक गया।
कैमरा ऑन था और सेट पर क्रू मेंबर्स मौजूद थे। फिल्म की एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया भी इस दौरान वहां थीं। उन्होंने जैसे ही देखा कि नोरा वार्डरोब मालफंक्शन का शिकार हो रही हैं तो वे उनके बचाव के लिए दौड़ीं।'
खुद नोरा ने अपने साथ घटी इस घटना के बारे में बताया है। वे कहती हैं, "वो बहुत ही डरावने मोमेंट्स थे। मैं तमन्ना का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने समय पर आकर मेरी मदद की।"

कौन हैं नोरा फतेही

नोरा फतेही मोरक्कन मूल की एक्ट्रेस हैं। साल 2014 में डायरेक्टर कमल सदाना की फिल्म 'रोर : टाइगर्स ऑफ द सुंदरवन' से बॉलीवुड में एंट्री ली थी। इसके बाद वे 'क्रेजी कुक्कड़ फैमिली' और 'मिस्टर एक्स' में नजर आ चुकी हैं।
शूटिंग के दौरान सबके सामने खिसक गई एक्ट्रेस की ड्रेस, तमन्ना ने बचाया

शूटिंग के दौरान सबके सामने खिसक गई एक्ट्रेस की ड्रेस, तमन्ना ने बचाया

शूटिंग के दौरान सबके सामने खिसक गई एक्ट्रेस की ड्रेस, तमन्ना ने बचाया

गुजरात में बारिश से शेरनी की मौत: 13 शेर लापता, 50 जंगल छोड़ गांवों में भागे

गुजरात के गिर के जंगलों से सड़क पर आए शेर। बताया जा रहा है कि जंगल में कीचड़ से शेर परेशान हो गए हैं।अहमदाबाद/अमरेली (गुजरात). बारिश और उसके बाद बाढ़ जैसे हालात से बुरी तरह प्रभावित गुजरात के अमरेली जिले में आम लोगों के साथ जंगल में रहने वाले जानवर, खासकर शेरों का जीना मुहाल हो गया है। मंगलवार से गुरुवार के बीच हुई बारिश के कारण एक शेरनी की मौत हो गई। 13 शेरों का पता नहीं चल रहा है, जबकि 50 शेर जंगल छोड़ गांवों में चले गए हैं। गुरुवार को गिर के जंगलों से निकले कुछ शेरों काे खुले आम सड़क पर घूमते भी देखा गया था (देखें वीडियो)
बारिश से सबसे ज्‍यादा प्रभावित अमरेली के लिलिया और कराकच में नदी के किनारे बसे बवाडी गांव में लोगों ने एक शेरनी का शव तैरते देखा। बवाडी गांव के ही रहने वाले बाबू सोजीतरा ने कहा, '' जब बारिश रुकी तो हम अपने खेतों में नुकसान का जायजा ले रहे थे। उसी दौरान हमने देखा कि एक खेत में कीचड़ से सना शेरनी का शव पड़ा था।'' कुछ लोगों का कहना है कि बाढ़ के कारण कराकच और लिलिया इलाकों की सड़कों पर शेरों को देखा गया है। लिलिया के निकट अनगोरोला गांव में एक शेरनी वहां के एक मंदिर में घुस गई है। बता दें कि बारिश के कारण गुजरात के अमरेली जिले में बाढ़ जैसे हालात हैं और अब तक 70 लोगों की मौत हो चुकी है।
जंगल छोड़ कर 25 गांवों में रह रहे हैं 50 शेर
सूत्रों के मुताबिक, जंगल में बारिश और कीचड़ के कारण शेर बाहर आ गए हैं। 50 ऐसे शेर हैं जो शेतुरनजी नदी के किनारे 25 गांव के आसपास इलाकों को अपना घर बना कर रह रहे हैं। मंगलवार की रात से ही इस इलाके में नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। (देखें फोटोज)
13 शेर लापता
अमरेली में भारी बारिश के बाद 13 शेर लापता पाए गए है। शेत्रुंजी नदी के आसपास ये सिंह डेरा डाले नजर आते थे। नदी गुरुवार को भी पूरे उफान पर रही। वन विभाग के मुताबिक, नदी के आसपास 40 शेरों का समूह रहता है। इनमें दो शेरनी, इनके तीन-तीन महीने के छह शेर के अलावा 10 नवजात शावक भी हैं। सप्ताहभर पहले ही जिले के शेढावदर के आसपास 13 शेरों का समूह नजर आया था। बुधवार को तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्र से कई भैंस और नीलगाय के भी बहने की जानकारी मिली है।
क्‍या कहते हैं अफसर
अमरेली के उप वन संरक्षक एमआर गुर्जर ने कहा, ''बारिश-बाढ़ में मरने वाली शेरनी आठ साल की थी। हमारी टीम उन सभी इलाकों-गांव में पहुंचने की कोशिश कर रही है, जहां शेरों के होने की संभावना है। अगर शेर कहीं फंसे मिलते हैं तो हम उन्हें वापस जंगल में छोड़ने की कोशिश करेंगे।''
* गुजरात में कुल शेर - 523
* गिर के जंगलों के बाहर रहने वाले शेर- 174
* लिलिया-कराकच में रहने वाले शेर- 50
(*आंकड़े पिछली गणना के मुताबिक, उससे पहले गुजरात में शेरों की संख्या 411 थी।)

बारिश-बाढ़ के कारण क्यों परेशान हैं शेर
जूनागढ़ इलाके में गिर के जंगलों में से शेर जैसे जानवर निकलकर हाईवे पर घूमते दिखाई दिए। बता दें कि गुजरात के गिर के जंगलों में शेरों की संख्या बढ़ी है। गुजरात में सौराष्ट्र के जंगलों के 20 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके के अंदर मौजूद संरक्षित क्षेत्रों में करीब 7 हजार छोटे तालाब और कुंड हैं। उनके आसपास फेंसिंग नहीं है। बारिश के कारण इन तालाबों का पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के इलाकों में घुस जाता है। इस वजह से गिर के सिंह पानी कम होने तक अपना इलाका छोड़ देते हैं। हालिया बारिश के बाद सिंह के सड़कों पर आ जाने का भी यही कारण हो सकता है। पिछले कुछ साल तक हर साल 15 सिंह गिर के इलाकों में मौजूद इन तालाबों में डूबकर मर जाते थे। तब खुले तालाबों और कुंडों की संख्या 25 हजार थी। गुजरात सरकार ने 2008 में एक योजना चलाकर तालाबों को कवर कराया था।

Wednesday, June 24, 2015

Miss tanakpur haazir ho producer reveals interesting facts of film

700 भैंसों का ऑडिशन लेने के बाद मिली 'Miss Tanakpur1 of 9